Monday, January 7, 2019

जद्दोजहद

मैं मछली हूँ
एक ठहरे तालाब में रहती हूँ
मैं जिस पानी की मछली हूँ
उसमें हवा नहीं है
दम घुटता है यहाँ
ऊपर से बड़ी मछलियां भी मुझे खाने को तैयार बैठी हैं
आदमी के जाल से तो रोज
बड़ी मुश्किल से बचती हूँ

कहते हैं जब प्रलय आया था
मछली ने ही मानव को बचाया था
पर मुझे कैद करने के लिए
सबसे पहले आदमी ने ही जाल बुना था
खैरआदमी तो अपने ही जाल में फंस गया

लेकिन आह! कहाँ मैं गहरे पानी की प्यासी
कैसे ठहरे तालाब में फंस गई?
मुझे तो बहते जाना है
नदी कीसमुद्र की
लंबी यात्राएं करनी है
अहा! आने दो बारिश को
तालाब को भर जाने दो
मैं छलांग लगाउंगी ऐसी
कि नदी आयेगी पास मेरे
समुद्र में मिल जाने की

अहा! सपने सच होंगे.

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