चाँद कितना अकेला है
उसकी नियति है
आधा अधूरा रहना
कभी चमचमाना तो कभी
अंधरे में डूब जाना
कभी अमावस तो कभी पूर्णमासी हो जाना
तमाम चमचमाते तारों के बीच भी हौसला न खोना
मैं भी चाँद हूँ!
उसकी नियति है
आधा अधूरा रहना
कभी चमचमाना तो कभी
अंधरे में डूब जाना
कभी अमावस तो कभी पूर्णमासी हो जाना
तमाम चमचमाते तारों के बीच भी हौसला न खोना
मैं भी चाँद हूँ!
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