Sunday, January 20, 2019

मैं भी चाँद हूँ

चाँद कितना अकेला है
उसकी नियति है
आधा अधूरा रहना
कभी चमचमाना तो कभी
अंधरे में डूब जाना
कभी अमावस तो कभी पूर्णमासी हो जाना
तमाम चमचमाते तारों के बीच भी हौसला न खोना
मैं भी चाँद हूँ!

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