Wednesday, September 30, 2020

बलात्कारी का लिंग

ये जो पुरुष लिंग है,
बलात्कार का भी प्रतीक है!
बलात्कारी को इतनी ताकत मिलती कहाँ से है
कि उसे डर नहीं होता कानून का! 
उसे मिलती हैताकत 
पितृसत्ता के मनोबल से,
प्रशासन के सहयोग से,
राजनीति की विद्रूपताओं से
जातियों के अहम अहंकार से
लिंगोत्थान के इश्तेहार से।
बलात्कारियों को यूँ ही 
कभी अपराधबोध नहीं होता
क्योंकि वे अपने लिंग को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं।
यह लिंगदोष है! पितृसत्ता का!!
इस लिंगदोष के पीछे खड़े 
ताकतों को कुचला जाना जरूरी है।

 


Thursday, April 23, 2020

प्रेम में मासूमियत, सम्मान और परिपक्वता का जब मेल होता है तो वह कविता, कला होते हुए अंततः अखण्ड हो जाता है। लोग ईश्वर से प्रेम से करते हैं लेकिन वे नहीं जानते ईश्वर भी उन्हें प्रेम करता है या नहीं, वे तो बस ईश्वर की कृपा की प्रार्थना करते हैं। ईश्वर से जिद नहीं करते कि बदले में ईश्वर भी वैसा ही करे। तो इंसान जिसे हम प्रेम करते हैं, जरूरी तो नहीं कि बदले में वो भी वैसा ही प्रेम करे। प्रेम को पा लेने की अभिलाषा या पारस्परिक आदान-प्रदान की अभिलाषा प्रेम के निहितार्थ को संकुचित करता है।  प्रेम एक तरफा हो या दो तरफा, प्रेम सीधे रास्ता चलता है। उसे दाएँ- बायें चलना नहीं आता। प्रेम एक एहसास है। ये एहसास हर किसी के लिए अलग-अलग ही है। दो लोग आपस में प्रेम में होते हुए भी बराबर का आदान-प्रदान नहीं करते हैं। दोनों के लिए यह महसूस भी अलग-अलग ही होता है। ज्यादा की उम्मीद करना प्रेम नहीं, बल्कि बदले की उम्मीद भर है। दूसरे संदर्भ में, एक तरफा प्रेम भी किसी अन्य प्रेम के जितना ही गहरा ,पवित्र और सकारात्मक हो सकता है। प्रेम का स्वरूप चाहे जो भी हो, प्रेम की अनुभूति को अपने-अपने दायरे में जीना भी तो जिंदगी का सबसे खूबसूरत तोहफ़ा है।

Sunday, April 19, 2020

एक तालाब की मछली
नदी के पास आने का
सपना देखा करती थी
कई बरसात निकले
पर नदी पास नहीं आई
एक दिन तालाब सूख गई
मछली भी अपने अधूरे सपनों
सहित जमींदोज हो गई
कहते हैं हर बरसात में
वो मछली उसी तालाब में
फिर से जिंदा हो जाती है
इस उम्मीद में कि
नदी आएगी
बाढ़ लाएगी
और वह नदी में विलीन हो जाएगी 

Tuesday, March 10, 2020

तुम मेरी धरती हो

चाहता तो हूँ, तुम्हें
लेकिन इसलिए नहीं की
तुम मेरी हो जाओ

मैं तुम्हें पाना नहीं
तुम्हारे लिए जीना चाहता हूँ
जैसे चाँद जीता है
धरती के लिए
हमारा जन्म सिर्फ मरने के लिए नहीं हुआ है। हम दुनिया को कुछ देने के लिए आये हैं। हम कुछ देकर ही जाएंगे। हम दुनिया के खूबसूरती में कुछ जोड़ने आये हैं। लाख परिस्थितियां प्रतिकूल हो, हम उसे अनुकूल बनाएंगे। हम किसी भी हालात में अराजक नहीं होंगे। जिनमें संभावना है उनके ही जीवन में दुख है। फूलों की जिंदगी छोटी होती है लेकिन वे हमेशा फूलों को ही जन्म देते हैं। हम भी कोमलता को ही पैदा करेंगे और एक दिन चुपचाप चले जाएंगे। 
बहुत सी ऊंचाईयां या तो हम प्रेम में होते हुए प्राप्त करते हैं या बहुत सी ऊंचाईयां प्रेम से वंचित होने के कारण प्राप्त करते हैं। पर हर हालात में प्रेम ही सर्वोपरी है। प्रेम का इस दुनिया में कोई विकल्प नहीं होता। जितना मृत्यु सत्य है, उतना ही प्रेम भी सत्य है। 
फासले इतना ज्यादा है कि
अब उन्हें फोन में ढूंढते हैं।

Sunday, February 23, 2020

आधा अधूरा


यह जानते हुए भी कि
आधा हूँ- अधूरा हूँ
स्थापित हूँ- विस्थापित हूँ
शापित हूँ- निर्वासित हूँ
आह! ज़माने के पैमाने से भी
गैर मुनासिब हूँ
फिर भी उनके उदास मौसम का
वसंत क्यों होना चाहता हूँ?


Friday, February 7, 2020

ऐ दौरे जिंदगी
मत करना मुझे किसी और की जिंदगी में दाखिल
तेरी फरमाइशों की जद्दोजहद इतनी लंबी है
मैं शायद कभी पूरा ही नहीं कर पाऊँ