Wednesday, September 30, 2020

बलात्कारी का लिंग

ये जो पुरुष लिंग है,
बलात्कार का भी प्रतीक है!
बलात्कारी को इतनी ताकत मिलती कहाँ से है
कि उसे डर नहीं होता कानून का! 
उसे मिलती हैताकत 
पितृसत्ता के मनोबल से,
प्रशासन के सहयोग से,
राजनीति की विद्रूपताओं से
जातियों के अहम अहंकार से
लिंगोत्थान के इश्तेहार से।
बलात्कारियों को यूँ ही 
कभी अपराधबोध नहीं होता
क्योंकि वे अपने लिंग को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं।
यह लिंगदोष है! पितृसत्ता का!!
इस लिंगदोष के पीछे खड़े 
ताकतों को कुचला जाना जरूरी है।

 


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