एक तालाब की मछली
नदी के पास आने का
सपना देखा करती थी
कई बरसात निकले
पर नदी पास नहीं आई
एक दिन तालाब सूख गई
मछली भी अपने अधूरे सपनों
सहित जमींदोज हो गई
कहते हैं हर बरसात में
वो मछली उसी तालाब में
फिर से जिंदा हो जाती है
इस उम्मीद में कि
नदी आएगी
बाढ़ लाएगी
नदी के पास आने का
सपना देखा करती थी
कई बरसात निकले
पर नदी पास नहीं आई
एक दिन तालाब सूख गई
मछली भी अपने अधूरे सपनों
सहित जमींदोज हो गई
कहते हैं हर बरसात में
वो मछली उसी तालाब में
फिर से जिंदा हो जाती है
इस उम्मीद में कि
नदी आएगी
बाढ़ लाएगी
और वह नदी में विलीन हो जाएगी
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