मनकस्तूरी
(आकांक्षा और विखराव का द्वंद्व)
Wednesday, October 16, 2019
मैं कोई चमकता तारा नहीं था
मैं एक धूमकेतु था
धरती की चाहत में
आसमान में ही टूटकर
बिखड़ जाना
मेरी नियति थी।
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