वो नदी के तट पर बैठा
नदी को अपलक निहारता रहा था
नदी भी थोड़ी शांत थी
नदी ने धीरे से कहा ऐसे मत निहारो
मैं सूख जाऊंगी
वो कुछ कह पाता
पल भर में ही
नदी सचमुच सूख गयी थी
नदी को अपलक निहारता रहा था
नदी भी थोड़ी शांत थी
नदी ने धीरे से कहा ऐसे मत निहारो
मैं सूख जाऊंगी
वो कुछ कह पाता
पल भर में ही
नदी सचमुच सूख गयी थी
बदहवासी में वो नदी को रात भर पुकारता रहा था
उसके शब्द निर्रथक हो चुके थे
उसकी आवाज़ चली गई थी
और नदी अदृश्य हो चुकी थी
जिन पगडंडियों के जरिये वो नदी से मिला था
वे भी उसके साथ छोड़ चुके थे
जिन पगडंडियों के जरिये वो नदी से मिला था
वे भी उसके साथ छोड़ चुके थे
आज भी
जब भी बरसात आती है
वह नदी को ढूंढ़ने निकल जाता है।
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