Wednesday, October 16, 2019

मैंने पहला पत्र एक कौवे को लिखा था- और वो भी अपनी डायरी में। उस वक़्त मैं चौथी में पढ़ता था। हुआ यूँ था कि एक मित्र ने मुझे जादू दिखाया और दावा किया कि वो एक रुपये को दो सिक्के में बदल देगा। उसने एक लिफाफे में ब्रेड का टुकड़ा, थोड़ा कोयला का राख रखकर ऊपर हवा में उछाला। मैं ऊपर देखा और नीचे दो सिक्के दिखे। एक दिन अकेले में मैंने इसे आजमाने का सोचा। मैंने उसी तरह लिफाफे में ब्रेड और कोयले का राख रखा। मैंने जैसे ही लिफाफे को हवा में उछाला, पता नहीं एक कौवे ने कब से घात लगा बैठा था वो ऊपर से ही लिफाफे को लपक कर उड़ कर बिलिंग के मुडेर पर बैठ गया था। मैं बहुत निराश था क्योंकि वे उस दिन के मेरे पास आखिरी सिक्के बचे हुए थे। तब से अब तक कोई न कोई मेरे उस लिफाफे को लेकर उड़ता रहा है। मैं उस सिक्के के इंतजार में आज भी जी रहा हूँ।

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