Thursday, April 25, 2019

इस आधे अधूरे जीवन में
कहाँ मिलती है पूर्णता
तन और मन का द्वंद्ध
करता है अक्सर सपनों को लहूलुहान

मन भटकता है जब किसी के मन के लिए,
जाति, धर्म, रीतिरिवाज की दीवारें खड़ी हो जाती हैं।
जीवन को चाहिए होता है एक कंधे की तलाश, पर
अक्सर यहाँ कंधे भी परिवारों के गिरवी होते हैं।
इस तरह कभी मिलता है अगर मन
तो एक मजबूत कंधा नहीं मिलता।
उदास शाम के बीच झूलती यह जिंदगी
एक स्वायत मन की, एक मजबूत कंधे की
करती रहती है एक अंतहीन प्रतीक्षा।

Sunday, April 21, 2019

तुम नहीं आओगी

मालूम है,
तुम नहीं आओगी
फिर भी तुम्हारा बहुत कुछ रह जाएगा
मेरे ही पास।

जैसे तुम्हारी आँखे
तुम्हारी आँसू
तुम्हारी हँसी
तुम्हारी सादगी
हमारी अनर्गल बातें
वो पगडंडियां
वो रेस्त्रायें
तुम्हारी कविताएं
तुम्हारी किताबें
थोड़ा सा मनमुटाव
थोड़ी सी उलझन
फिर एक अनकही रहस्मय चुप्पी का पसर जाना
और बेबसी में हालात से समझौता
कितना कुछ तो है तुम्हारा
अभी भी मेरे पास।

तुम्हारा ये कहना कि
मैंने कभी सोची नहीं थी
कोई मुझे भी इतना टूटकर चाह सकता है
यही है मेरी सबसे प्यारी यादें
मेरा प्यार धन्य हो गया है

हाँ, अभी मेरे पास कोई गीत नहीं है,
लेकिन एक दिन मैं रचूंगा,
दुनिया का सबसे खूबसूरत गीत तुम्हारे लिए।
मुझे मालूम है
तुम फिर भी नहीं आओगी!