Thursday, February 14, 2019

इश्क के बिना मुक्ति कहाँ है -चाहे वो सच्चा हो या अधूरा। जीने के लिए एक इश्क का होना जरूरी है-चाहे वो अधूरा ही क्यों न हो। एक ऐसा इश्क जो हमारी रूह को जगा दे। इसलिए तो इश्क एक इबादत है।

आँसू और इश्क के बीच एक गहरा संबंध है। इश्क में आँसू न बहे ऐसा हो ही नहीं सकता। यह आँसू ही है जो इंसान के अंदर की नमी को बचाये रखता है। जो इश्क मुक्कमल न हो पाता, उसके याद में भी आँसू बरबस आ जाते हैं। भले ही इन आँसुओं की कद्र न की गई हो लेकिन यही आँसू इश्क की पवित्रता को बचाये रखते हैं। टूटा हुआ इश्क भले पीड़ा दे जाता है लेकिन छुटा हुआ इश्क जीने का मकसद भी दे जाता है। इश्क में अपने ईष्ट को खोने का डर हमेशा बना रहता है। उसके चुपचाप गुम हो जाने का भय बहुत सताता है।

बिना इश्क के कुछ भी प्रेरक नहीं होता। यह इश्क मुक्कमल भी हो सकता है। यह इश्क पूरी जिंदगी किसी की याद में बिताने का भी हो सकता है। जीवन है तो इश्क है और बिना इश्क के तो जीवन बेमतलब सी ही है।

Wednesday, February 13, 2019

देखो समय
ये जो
तुम रोजाना आ जाते हो
शाम को घनघोर अंधेरा बनकर
और मेरे अंदर शून्य भर देते हो

मैं विचलित नहीं होने वाला
तुम्हारे इस अशुभ आगमन से
मैं तमाम उम्र इसी तरह
अंधेरे को चीरकर
हर सुबह
फिर से तुमसे लड़ने के लिए तैयार मिलूँगा

क्योंकि
अब कलम ने अब मेरा हाथ थाम रखा है
सुकून है कि अब
अंधेरे को 'उजाला' लिख दूंगा
डर को 'जीत' लिख दूंगा
नफरत को प्यार लिख दूंगा
पर प्यार को 'प्यार' ही लिखूँगा
और इस तरह
अपने अक्षरों के साथ
मैं, तुम्हें
दुनिया में मासूम हँसी को बचाता हुआ मिलूँगा