Tuesday, December 6, 2022

पतझड़


मेरे पसंदीदा व्यक्ति, 
शहर और रुचियां 
मुझसे दूर भागते रहे हैं।
जो पीछे छूटे
फिर कभी वापिस नहीं आए। 
सोचता हूँ  
आखिर इस हिज्र-ज़दा की नियति क्या है?
तो पाता हूँ
मैं वो बर्ग-ए-ख़िज़ाँ-रसीदा हूँ 
जिसे पतझड़ ने ही सँवारा है। 


हिज्र-ज़दा: अकेलेपन का मारा
बर्ग-ए-ख़िज़ाँ-रसीदा: वह पता जिसे पतझड़ ने पिला कर दिया हो।