यह जानते हुए भी कि
आधा हूँ- अधूरा हूँ
स्थापित हूँ- विस्थापित हूँ
शापित हूँ- निर्वासित हूँ
आह! ज़माने के पैमाने से भी
गैर मुनासिब हूँ
फिर भी उनके उदास मौसम का
वसंत क्यों होना चाहता हूँ?
गैर मुनासिब हूँ
फिर भी उनके उदास मौसम का
वसंत क्यों होना चाहता हूँ?