शब्द, जो कभी उसे तस्सली देते थे, अनौपचारिक हुआ करते थे, अब बेहद औपचारिक हो गए थे।
वो कविता में लिपटा हुआ,
टूटी हुई कविता के साथ मर रहा था
उसे जिन शब्दों पर अभिमान था,
उन्हीं शब्दों ने कर दी थी उसकी हत्या!
वो कविता में लिपटा हुआ,
टूटी हुई कविता के साथ मर रहा था
उसे जिन शब्दों पर अभिमान था,
उन्हीं शब्दों ने कर दी थी उसकी हत्या!